Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 16, 2026
0000
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 अक्टूबर 2022। अनीतिपूर्ण काम की अति होने पर राज से न्याय की उम्मीद की जाती है और जब राज भी बेबस हो तो हैरान परेशान आमजन के मुख से यही निकलता है कि हे राम, हे राम, हे राम! श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में फर्जी पट्टो के माध्यम से करोड़ो रुपये के बाजार मूल्य की भूमि की मची लूट खसोट को देखते हुए कस्बेवासियों के मुंह से भी अब यही निकल रहा हैं कि हे राम। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में चल रही महाभारत की अंदर की खबरें मसले की गम्भीरता को जाहिर कर रही है। ऐसी ही खबर है पालिका में फर्जी पट्टा बनाने के आरोपी नरेश तेजी के सबन्ध में। यहां फिलहाल विवाद नगरपालिका में तौफीक बहलीम द्वारा नियम विरुद्ध 4805 वर्ग मीटर का पट्टा बनवाने का जोर शोर से चल रहा है। इतनी बड़ी भूमि का पट्टा बनाना पालिका के क्षेत्राधिकार से बाहर का मसला है और इस पट्टे की प्रति वायरल होने के बाद पालिका ईओ द्वारा पालिका के तीन कार्मिक कनिष्ठ सहायक नरेश तेजी, जेईएन भरत गौड़ और रविशंकर जोगी के खिलाफ षडयंत्र रच कर, तौफीक के साथ मिल कर धोखाधड़ी करने का मुकदमा गत 15 अक्टूबर को दर्ज करवाया गया था। इस मुकदमे के बाद क्षेत्र में खासी सरगर्मियां रही। 20 अक्टूबर को ईओ भवानीशंकर व्यास को एपीओ करने का राजकीय आदेश आ गया। ऐसे में ईओ भवानीशंकर व्यास ने जाते जाते अंतिम काम फर्जी पट्टा बनाने में प्रथम द्रष्टया दोषी पाए जाने पर नरेश तेजी को निलंबित करने का आदेश निकाला। इससे भी ज्यादा रोचक बात यह रही कि उनकी जगह स्थानांतरित होकर आए नए ईओ ललित सिंह देथा ने 21 अक्टूबर को ज्वाईन करते ही सबसे पहला काम निलंबित कार्मिक नरेश तेजी के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया गया। ऐसे में पूरे कस्बे में यही चर्चा रही कि क्या ललित सिंह देथा को केवल इसी फर्जी पट्टे के प्रकरण को मैनेज करने के लिए ही श्रीडूंगरगढ़ लाया गया था..?

कागजात भी गायब।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 अक्टूबर 2022। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका में राजकीय कागज लगातार गायब हो रहे हैं। यहां फर्जी पट्टे के सबन्ध में भी कोई फाइल नहीं मिल पाई और सबधित शाखा में उसका कोई रिकार्ड भी नहीं मिला है। इसी कारण ईओ द्वारा फर्जी पट्टा बनाने का मुकदमा करवाया गया। लेकिन मजे की बात यह है कि निलंबित कार्मिक नरेश तेजी के निलंबन आदेश के निरस्तीकरण के संबंध में भी पालिका के संस्थापन शाखा में कोई कागजात नहीं है। पालिका के किसी भी कार्मिक के निलंबन, या निलंबन आदेश के निरस्तीकरण के सबन्ध में पालिका की संस्थापन शाखा में फाइल बनती है। लेकिन नरेश तेजी के निलंबन निरस्त करने के सबन्ध में संस्थापन शाखा में कोई कागजात होने के बजाय केवल डिस्पेच रजिस्टर में एक एंट्री ही मिली है।

ऐसा क्या कारण की सबसे पहला काम यही हुआ।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 अक्टूबर 2022। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका के ईओ भवानीशंकर व्यास के एपीओ आदेश 20 अक्टूबर की शाम को आने के साथ ही संभावना भी सबको थी कि वो इस आदेश को न्यायालय में चुनोती देंगे और स्टे का प्रयास करेंगे। ऐसे में स्थानांतरित होकर आए ईओ ललित सिंह देथा ने 21 को सुबह ही ज्वाइन कर लिया और ज्वाइन होने के साथ ही बिना किसी जांच के सबसे पहला आदेश नरेश तेजी का निलबंन निरस्त करने का निकाला। ऐसे में क्षेत्र में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि कोई भी अधिकारी पिछले निलबंन के आदेश को निरस्त करने से पहले तत्काल बहाल करने के लिए ठोस कारण जाने बिना ही कैसे आदेश निकाल सकता है? ऐसे में हर कोई यही कह रहा है कि शायद देथा इसी काम विशेष के लिए आए थे।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नए अधिशाषी अधिकारी ने आते ही 21 अक्टूबर को निकाला निलंबन निरस्तीकरण का आदेश।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। 20 अक्टूबर को ईओ भवानी शंकर व्यास ने किया निलंबन।