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October 17, 2026
चलता रहा झाड़ फूंक से उपचार, मानसिक रोगी ने लगाई फांसी, कब होगें जागरूक.? खड़ा हुआ बड़ा सवाल।
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 मार्च 2022। सरकारों द्वारा हर वर्ष अरबों रुपए का बजट शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर खर्च किया जाता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में फैला अंधविश्वास अभी भी लोगों की जान ले रहा है। यही देखने को मिला है श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के गांव दुसारणा बड़ा में। प्राप्त जानकारी के अनुसार दुसारणा बड़ा निवासी 36 वर्षीय मुन्नीदेवी उर्फ कुन्नदेवी जाट गत 5-6 सालों से मानसिक रूप से बीमार थी एवं परिजनों द्वारा झाड़ फूंक के चक्कर में पड़ कर उपचार भी करवाया जा रहा था। मुन्नीदेवी ने मंगलवार को अपने घर में ही खुद को फांसी पर लटका लिया। हालांकि परिजनों ने उसे आत्महत्या का प्रयास करते हुए देख लिया एवं उसे तुंरत उतार कर श्रीडूंगरगढ़ चिकित्सालय लेकर आए। रास्ते में उसे दो-तीन उल्टियां हुई एवं चिकित्सालय पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस संबध में मृतका के पीहर पक्ष के लोग भी रीड़ी से श्रीडूंगरगढ़ पहुंच गए। मृतका के पति जेठाराम जाट ने इस संबध में मर्ग दर्ज करवाई है एवं पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। विदित रहे कि क्षेत्र में मानसिक रूप से परेशान एवं कमजोर लोगों द्वारा हताश होकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने के कई मामले सामने आ रहे है। एवं विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे लोगों को अगर सही समय पर उपचार एवं सही माहौल मिल जाए तो उन्हें आत्महत्या करने से बचाया जा सकता है। झाड़फूंक के उपचार की शिकार बनी मुन्नीदेवी की आत्महत्या ने एक बार फिर से यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब सामान्य जन इन अंधविश्वासों से दूर होकर सही इलाज करवाने की ओर कदम बढ़ाएंगे।