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October 16, 2026
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उत्तर प्रदेश विधान सभा के विधान सभा चुनाव का अब चौथा चरण है, यहां पहुंचते पहुंचते चुनावी मुद्दे भी बदल गये हैं। विकास, यूपी में सुशासन, राम मंदिर आदि से मुद्दे साईकिल, आतंकवाद, हिजाब, व्यक्तिगत आरोप तक पहुंच गये हैं जो ये जताता है कि केवल वोट पाना ही मुख्य लक्ष्य रह गया है।
सोमवार को चौथे चरण का चुनाव प्रचार थम गया। इस चरण में तराई इलाके की गन्ना बेल्ट आती है। जिसमें पीलीभीत, सीतापुर, हरदोई और किसान आंदोलन से चर्चा में आया लखीमपुर खीरी जिले शामिल है। इनके अलावा फतेहपुर, उन्नाव व बांदा जिले की सीटों पर इस चरण में वोट पड़ेंगे।
बात सबसे पहले लखीमपुर खीरी की। ये इलाका किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के कारण खास चर्चा में है। किसानों को रौंदने की घटना का गुस्सा किसानों में अब तक है। जिसका असर मतदान पर पड़ेगा। किसान नेताओं ने भी यहां के दौरे कर अपने गुस्से को अभिव्यक्त किया है। राकेश टिकेत अपने दल बल के साथ यहां मतदान से पहले पहुंचे और किसानों की मृत्यु के आरोपी की जमानत पर सवाल खड़े किए और आगे के आंदोलन की घोषणा की। ये बातें ही भाजपा को परेशान किये हुए है। भाजपा नेताओं ने इस इलाके में मुद्दा बदलने की खूब कोशिश की है ताकि किसानों की मौत मुद्दा न बने, मगर उसमें उसे कम ही सफलता मिली। इसी कारण उसने आतंकवाद और साईकिल कनेक्शन का मुद्दा खड़ा करने की कोशिश की।
सपा रालोद गठबंधन ने यहां किसानों के लिए घोषणाओं का अंबार लगाया ताकि पिछले तीन चरणों की तरह उसे किसान का साथ मिलता रहे। अखिलेश और जयंत चौधरी ने यहां खूब मेहनत की है क्योंकि ये चरण ही गठबंधन के भविष्य की तस्वीर को पूरी तरह साफ कर देगा।
गन्ना किसानों की समस्याएं भी यहां बड़ा मुद्दा है। उनको समय पर भुगतान न होने और पुराना भुगतान बकाया रहने की बात भाजपा के लिए संकट खड़ा किये है। इस इलाके की पूरी अर्थ व्यवस्था गन्ने पर ही टिकी है, ये किसान बुरी स्थिति में है। इसका असर चुनाव पर पड़ेगा, ऐसा राजनीति के जानकारों का भी मानना है।
उन्नाव, फतेहपुर व बांदा सदा सुर्खियों में रहे हैं इसलिए भाजपा ने यहां आतंकवाद, राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाने की कोशिश की है। इसमें वो कितना सफल रही है ये तो परिणाम ही बताएंगे, क्योंकि सपा गठबंधन ने भी इसके तोड़ में पूरी ताकत झोंकी है। जुबानी जंग इस चरण के प्रचार में ज्यादा तीखी रही है। उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि भी यहां बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा दोनों तरह के भीतरी असंतोष का भी चुनाव पर असर पड़ेगा। सपा और भाजपा के कई उम्मीदवारों का उनकी ही पार्टी के लोग विरोध कर रहे हैं।
कुल मिलाकर ये चौथा चरण यूपी की अगली सरकार की तस्वीर को काफी हद तक स्पष्ट कर देगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार