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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 दिसम्बर 2019। विभिन्न सरकारी विभागों में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यूनियनें बनी हुई है एवं पूरे देश में हर कर्मचारी यह भी मानता है कि कर्मचारी युनीयनों के नेता कभी अपना मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करते। ऐसे में सरकारी विभागों में सुधार के प्रयास अक्सर बेमानी हो जाते है एवं विभागों के उच्च पदस्थ अधिकारियों को इन कर्मचारी नेताओं के आगे अक्सर झुकते देखा जा सकता है। लेकिन अब सरकार कठोर मूड में है एवं यूनियन की आड़ में अपना विभागीय कार्य नहीं करने वाले कर्मचारी नेताओं की छंटनी शुरू कर रही है। यह शुरूआत रेलवे से हो रही है एवं रेलवे के अधिकारियों ने रेलमंत्री को रिपोर्ट देते हुए रेलवे में काम का जीरो आउटपुट वाले करीब 50 हजार कर्मचारी नेता होने की बात स्वीकारी है। रेलवे अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि यह कर्मचारी नेता अपना काम तो करते ही नहीं है बल्कि कर्मचारी हित की बात करते हुए अन्य कार्मिकों की कार्यक्षमता पर विपरीत असर डालते है। इस रिपोर्ट को मानते हुए रेलवे ने इन कर्मचारी नेताओं की छंटनी शुरू कर दी है एवं अगले तीन साल में दस प्रतिशत एवं बाद में चरणबद्ध तरीके से 50 प्रतिशत नेताओं को सिस्टम से बाहर करने की योजना बना ली है। आय से अधिक खर्च के विषय पर रेलवे में सुधार के लिए हुई इस संगोष्ठी में यूनियन को दी जाने वाली सुविधाओं पर भी पुर्नविचार करने की जरूरत मानी गई है। दो हजार से अधिक आए सुझावों में रेलवे ने माना है कि इन युनीयनों में 50 हजार कर्मचारी नेता रेल संचालन का कोई काम नहीं कर रहे है। रेलवे का मानना है कि बजट का 60 प्रतिशत खर्च केवल स्टाफ पर ही हो रहा है। जिसे कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी।

अन्य विभागों के लिए चेतावनी।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रेलवे द्वारा कर्मचारी नेताओं की छंटनी की शुरूआत को अन्य विभागों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। हालांकी सभी विभागों के अपनी अपनी यूनियनें है एवं हर विभाग में कर्मचारी नेताओं के खिलाफ अधिकारियों में नाराजगी ही रहती है। हालांकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा एवं अधिकारियों की मनमानी रोकने के लिए इन यूनियनों का होना भी आवश्यक है लेकिन कर्मचारी नेताओं द्वारा अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद यूनियनों का कार्य करने से ही कर्मचारी नेताओं की काम नहीं करने की छवि सुधर सकती है।