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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 19 जून 2021। समकोण आसन आसान होने के साथ ही बच्चों के लिए विशेष उपयोगी है। यह शारीरिक अवस्था में सुधार लाता है और रीढ़ की विकृति को दूर करने में सहायक है। समकोण आसन की विधि-
1.दोनों पैर मिलाकर खड़े हो जाएं। दोनो हाथों को सामने की ओर से सांस भरते हुए, सिर के ऊपर लेकर आएं। बाजू सीधी रखे और हथेलियों को कलाई मे मोड़ लिजिए।
2.कमर को थोड़ी पीछे करिए ताकि रीढ़ बिल्कुल सीधी हो जाए. अब नियंत्रणपूर्वक सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकिए।
3.शरीर, गर्दन बाज़ूओं को एक सीध में रखीए और तब तक आगे झुकिए जबतक आपका शरीर ज़मीन के समानांतर न हो जाए। इस स्थिति में पाँच सिकेंड तक रुकिए और सामने की ओर देखने का प्रयास करें।
4.इसी प्रकार सांस भरते हुए फिर से शरीर को सीधा कर लिजिए और सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे कर लिजिए. तीन से पांच बार तक समकोण आसन का अभ्यास करना चाहिए।
*सावधानी*
सायटिका और किसी भी प्रकार के कमर दर्द में समकोण आसन नहीं करना चाहिए।
*फ़ायदा*
1.समकोण आसन के अभ्यास से कमर के ऊपर की माँसपेशियों पर विशेषतौर पर प्रभाव पड़ता है. ख़ासतौर पर छाती के पिछले भाग की माँसपेशियां सशक्त होती है।
2.समकोण आसन रीढ़ की विकृति को दूर करता है और इसके नियमित भ्यास से शारीरिक अवस्था में भी सुधार होता है।