Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 17, 2026
क्यों मनाए ये नव वर्ष, क्या करें, कैसे करें सेलेब्रेशन.? जानें विशेष जानकारी।
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 अप्रैल 2021। पाश्चात्य नव वर्ष मनाते मनाते युवा पीढ़ी संभवतः भारतीय नव वर्ष के महत्व को पहचान ही नहीं पाती है। श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स अपनी सांस्कृतिक जड़ों से आपको सिंचित करने के लिए आज विशेष जानकारी के साथ बता रहें है कि क्यों ये नव वर्ष मनाए व कैसे मनाए.?

क्यों मनाए ये नव वर्ष.?

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवसंवत्सर का आरंभ होता है, आज के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। धार्मिक शास्त्रों में यह अत्यंत पवित्र तिथि मानी गई है। भगवान राम के राज्याभिषेक का दिन यही था। द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने राज्याभिषेक के लिए इसी दिन को चुना। शक्ति और भक्ति के  9 दिन अर्थात नवरात्र का पहला दिन आज ही है। सिख परंपरा में द्वितीय गुरु श्रीअंगद देव जी का जन्म इसी दिन हुआ। स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के लिए चुना। आज से वसंत ऋतु का आरंभ होता है जो उत्साह, उमंग, खुशी, सुगंध भरा होता है। किसानो की फसल पकने से उसकी मेहनत का फल मिलने का यही समय होता है। नक्षत्र शुभ स्थिति में होते है और किसी कार्य को प्रारंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त होता है।

 

कैसे मनाए भारतीय नव वर्ष का उत्सव।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। परस्पर एक दूसरे को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देवें। रिश्तेदारों, परिजनों व मित्रों को शुभ संदेश भेजें। अपने घरों के द्वार आम के पत्तों की वंदनवार से सजाएं। घरों व धार्मिक स्थलों की साफ सफाई कर रंगोली तथा फूलों से सजाएं। कोरोना काल में अपने घर के सभी सदस्यों के साथ समय बिताए व भजन कीर्तन करें।

महत्वपूर्ण है ये जरूर करें –

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आज के दिन एक संकल्प जरूर लेंवे और आज के इस संक्रमण काल में अच्छाई की ओर बढ़ें। आप एक संकल्प अवश्य लेवें । इस नव वर्ष में प्रकृति के लिए कुछ करने कुछ नया करे इसके लिए नए साल में कुछ नए पौधे लगाकर नेचर को और भी खूबसूरत बनाने का संकल्प ले। घर के हर सदस्य द्वारा एक पौधा अवश्य लगवाये।