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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 फरवरी 2021। इलाज में लापरवाही के चलते एक युवक को अंधा कर देने की खबर सामने आयी हैं। घटना ने जिसके बाद पीडित ने न्यायालय की शरण ली जहां पर 17 वर्षीय युवक को सिर दर्द ओर बेहोशी की शिकायत हुई। परिजनों ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए 17 वर्षीय शंकरलाल को चुरू के डॉ. मुमताज एनएच हॉस्पीटल में दिखाया। जहां पर डॉक्टर ने मरीज को भर्ती कर लिया और अलग-अलग तरह की दवाईयां बदल-बदल कर देता रहा। जब पीडि़त को आंखों की रोशनी सम्बंधी दिक्कत हुई तो डॉक्टर ने कहा कि इलाज में ऐसा हो जाता हैं। जिस पर परिजनों ने डॉक्टर की बात मान ली और इलाज जारी रखा। जब मरीज आंखों से एकदम अंधा हो गया तो परिजनेां ने मरीज को हिसार और रोहतक में डॉक्टरों को दिखाया। जिस पर डॉक्टरेां ने कहा कि गलत इलाज के कारण आंखे चली गयी हैं। परिजनों ने तुरंत जयपुर के एसएमएस अस्पताल में मरीज को दिखाया। वहां भी उन्हें गलत इलाज के कारण आंखे जाने की बात कही गयी और सिर में कैंसर या टीबी का कहा गया।

जिस पर डॉक्टरों ने मरीज के सिर से गंदा और अनुपयोगी पानी निकाल दिया। मरीज को इस दौरान टीबी का पता चला। जिसके बाद परिजनों मरीज को पीबीएम में दिखाया तो डॉक्टरों ने मरीज को सौ प्रतिशत अंधा बताते हुए प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इससे परेशान होकर मरीज के पिता शंकरलाल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष चुरू में परिवाद पेश किया जहां पर उसका परिवाद खारिज कर दिया। जिसके बाद हताश ओर परेशान परिजनों ने एडवोकेट द्धारकादास पारीक के माध्यम से बीकानेर में परिवाद पेश किया। जहां पर उनका वाद स्वीकार कर लिया गया।

इस परिवाद पर सुनवाई करते हुए कमल कुमार बागड़ी और शोभा सिंह ने दोनों पक्षों को सुनकर व तमाम दस्तावेजों का अवलोकन किया और प्रार्थी की अपील स्वीकार करते हुए आदेश दिया। उपभोक्ता न्यायालय ने गलत इलाज करने वाले डॉक्टर को 17 अगस्त 2011 से 200000 रूपए 9 प्रतिशत ब्याज से नगद अदा करने तथा 1500000 रूपए परिवाद प्रस्तुति कि दिनांक 17 अगस्त 2011 से आज तक 09 प्रतिशत ब्याज सहित जोड़कर जो राशि बनती है।

उस राशि की 10 वर्ष के लिए एफडी बनाई जाए। जिसका प्रतिमाह ब्याज प्रार्थी प्राप्त कर सकेगा और 10 वर्ष बाद प्रार्थी को मिलने वाली राशि का क्या करेगा यह प्रार्थी शंकरलाल की इच्छा पर निर्भर करेगा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग चूरु को निर्देश दिया कि विपक्षी के विरुद्ध धारा 340 सीआरपीसी के तहत कार्यवाही खोलकर अलग से जांच करें। इस आयोग के डिप्टी रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि अधीनस्थ मंच के रिकार्ड मैं संलग्न दोनों रजिस्टर तथा विपक्षी द्वारा पेश दस्तावेजों 12 /1 से लेकर 17/1 अलग से सील करके जिला मंच को रिकॉर्ड के साथ भेजें।