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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 फरवरी 2021। कहा जाता है कि अनुभव के बिना पदों पर कार्य संचालन कठिन है और राजनीति में यह सर्वाधिक लागू होने वाली कहावत मानी जाती है। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका चुनाव परिणाम में अधिकांश युवा व बुजुर्ग सभी पहली बार पालिका में पहुंचे है ऐसे में यह भी प्रश्न उठने लगा है कि पालिका कैसी चलेगी? पालिकाध्यक्ष पद पर भी अनुभवी को वरीयता दिए जाने की चर्चाएं भी चल रही है। हालांकि इन नए लोगों में शहर में बदलाव लाने के सपने बहुत है और सपनों के साथ अनुभव के सहारे शहर में विकास कार्य हो सकेंगे। बता देवें 40 सदस्यों में 4 ही अनुभवी पार्षद है व अनुभवी चार पार्षदों में पहला नाम भाजपा में लंबे समय से सक्रिय रहें विनोद गिरी गुसाईं का है। गुसाईं स्वयं पाचवीं बार चुनाव जीत कर पालिका पहुंचे है वहीं मानमल शर्मा एक बार स्वंय व दो बार पत्नी के पार्षद कार्यकाल के बाद चौथी बार पालिका पहुंचे है। निर्दलीय जीतने वाले सोहनलाल ओझा भी तीसरी बार जीत कर पालिका पहुंचे है। वहीं बता देवें राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवा पार्षद भी पालिका में पहुंचे है और लंबे पारिवारिक अनुभव की बात कह रहें है। भाजपा के अरूण पारीक के भाई व पत्नी भी पार्षद की भूमिका निभा चुके है और भरत सुथार के पिता व माता दोनों ही पार्षद रहें है वहीं कांग्रेस की अंजु पारख की सास, ससुर दोनों पहले पार्षद रही है, वहीं कांग्रेस की झणकार देवी के पति भी एक बार पार्षद रहें है व दूसरी बार वे पालिका पहुंची है। कांग्रेस के हीरालाल के भाई दो बार पार्षद रहें है और ललित कुमार सारस्वत के पिता कांग्रेस से पार्षद रहें है व पत्नी नेता प्रतिपक्ष भी रही है। भाजपा के विक्रम सिंह के दादा भी पार्षद रहें है और कांग्रेस के अभिषेक के पिता भी पार्षद बनें थे। भाजपा की सुजाता बरड़िया के दादा भी राजनीतिक विरासत छोड़ कर गए है जो अब पुनः पोती ने संभाली है। बाकी सभी पार्षद नए है जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और जीत कर नगरपालिका में जनता के दुख दर्द दूर करने पहुंचे है।