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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स, 21 सितंबर 2026। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका के पालिकाध्यक्ष चुनाव के परिणाम से शहर की राजनीति में नया मोड़ आया है। 40 वार्डों वाले बोर्ड में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बावजूद भाजपा की सांगठनिक एकता व राजनीतिक कुटनीति विजयी रही। भाजपा ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाकर पालिका की सत्ता अपने हाथ में कायम रखी है। कांग्रेस सबसे अधिक 15 पार्षदों के साथ चुनाव में उतरी थी, जबकि भाजपा के 13, निर्दलीय 2, विकास मंच 9 और माकपा का एक पार्षद निर्वाचित हुए थे। अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस से राधेश्याम सारस्वत को 15 मत, भाजपा से नारायण कलाणी को 16 वोट, विकास मंच से जतनसिंह राजपुरोहित को 8 वोट मिले है। चुनाव परिणाम ने स्पष्ट किया कि वार्डों में सबसे अधिक सीटें हासिल करने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक नहीं पहुंच सकी, वहीं भाजपा ने अपने पार्षदों और समर्थन के समीकरण के सहारे अध्यक्ष पद पर काबिज हो ही गई। इस चुनाव में विकास मंच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक नए राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आई। पहली बार मैदान में उतरे विकास मंच ने 9 वार्डों में जीत दर्ज कर शहर की परंपरागत राजनीतिक तस्वीर को प्रभावित किया था। अध्यक्ष चुनाव में मंच के प्रत्याशी जतनसिंह राजपुरोहित की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया और बोर्ड में इन पार्षदों के साथ मंच की भूमिका को खासा महत्वपूर्ण कर दिया। परंतु परिणाम के बाद मंच केवल दर्शक की भूमिका में ही नजर आई और अब संभवत पालिका में जनता का मजबूत पक्ष बनकर ही सब्र करना होगा। माकपा ने तीनों में से किसी को मत देना उचित नहीं समझा और मतदान से दूरी बनाई। इसकी भी आमजन में खूब चर्चा रही। अध्यक्ष चुनाव पूरी तरह पार्षदों के बीच समर्थन जुटाने के गणित पर निर्भर था। कुछ राजनीति के जानकार दोनों बड़े दलों के बीच एक से दो वोटों की क्रॉस वोट होने की बात भी कह रहें है।
भाजपा की जीत के साथ शहर में 40 वर्षों से चले आ रहे कांग्रेस द्वारा भाजपा के राजनीतिक प्रभाव को चुनौती देने का प्रयास इस बार भी नाकाम साबित हुआ और अध्यक्ष पद तक नहीं पहुंच सका, जबकि भाजपा ने पालिका में अपना कब्जा कायम रखा है। अब निगाहें 22 सितंबर को होने वाले उपाध्यक्ष चुनाव पर टिकी हैं, जिससे पालिका बोर्ड के आगामी राजनीतिक समीकरण की तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी।