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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 सितंबर 2026। निकाय चुनाव अपने अंतिम दौर में पहुंच चुके है। मात्र चार दिन मतदान में शेष है और गलियों से लेकर राजनीतिक मंचों तक चुनावी शोर जबरदस्त तेज है। प्रत्याशी हर दर दस्तक दे रहे हैं, समर्थक अपने नेताओं के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं और राजनीतिक दल जीत के दावे कर रहे हैं। इस पूरे चुनावी शोर के बीच एक महत्वपूर्ण मुद्दा गायब सा दिखाई दे रहा है और वो है शहर के विकास का स्पष्ट एजेंडा। राजनीतिक विश्लेष्कों का कहना है कि जिस चुनाव में शहर की आगामी सरकार चुनी जानी है, उसी चुनाव में जनता के सामने यह सवाल खड़ा है, कि अगले पांच वर्षों में शहर के लिए बड़ी पार्टियों की योजना आखिर है क्या? चुनाव अंतिम दौर में है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से अब तक ऐसा स्पष्ट घोषणा पत्र सामने नहीं आया, जिसमें शहर की मौजूदा समस्याओं का समाधान और भविष्य के विकास की ठोस तस्वीर दिखाई देती हो।
नेताओं की जुबान पर आरोप, लेकिन विकास कहां?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनावी प्रचार में एक-दूसरे पर आरोप लगाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। बड़े नेता भी आरोपों में ही उलझे है, कहीं पिछली व्यवस्था को जिम्मेदार बताया जा रहा है, तो कहीं पुराने कामो का हिसाब मांगा जा रहा है। राजनीतिक बयान तेजी से सामने आ रहे हैं, लेकिन शहर को क्या मिलेगा, कैसे मिलेगा और कब तक मिलेगा.? इस पर ठोस जवाब अपेक्षाकृत नदारद है। जनता के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है कि निकाय चुनाव में क्या किया जाएगा पर भी बात होगी?
सड़क, नालियां, सफाई और यातायात—मुद्दे पुराने, जवाब नए नहीं
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। शहर की बुनियादी समस्याएं किसी से छिपी नहीं हैं और सड़क और नालियों की स्थिति, सफाई व्यवस्था, जल निकासी, पेयजल, यातायात, पार्किंग, अतिक्रमण, स्ट्रीट लाइट और बढ़ती आबादी के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार, बढ़ते शहर की जरूरतें जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। इसके बावजूद चुनावी बहस में इन समस्याओं के स्थायी और समयबद्ध समाधान का ब्लू प्रिंट दिखाई नहीं दे रहा। जानकारों का कहना है कि प्रत्याशियों को भाषणों से नहीं, स्पष्ट घोषणा पत्र और अपने वार्ड के विकास के रोडमैप से जवाब देना चाहिए।
बड़ी पार्टियों के घोषणा पत्र कहां है?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। जानकारों का कहना है कि स्थापित दलों को निकाय की सत्ता हासिल करनी है, परंतु जिम्मेदारी नहीं। ऐसे में प्रत्याशियों की सूची जारी कर प्रचार करना ही पर्याप्त नहीं बल्कि शहर की जनता को यह भी बताया जाना चाहिए कि पार्टी की प्राथमिकताएं क्या होगी.? जीत के बाद उन प्राथमिकताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर घोषणा पत्र ही नहीं है तो जनता किस आधार पर विकास का मूल्यांकन करेगी?
चुनाव अब अंतिम दौर में, जनता मांगेगी हिसाब और विजन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। निकाय चुनाव का अंतिम दौर राजनीतिक दलों के लिए भी परीक्षा का समय बना हुआ है। राजनीतिक दलों में भी समझ की दरकार है कि जैसे जनता से वोट मांगना प्रत्याशियों का अधिकार है, तो उनसे विकास का हिसाब और भविष्य की योजना पूछना भी जनता का हक है। जन चर्चा है कि चुनावी शोर में विकास की आवाज दबनी नहीं चाहिए। बड़ी पार्टियों को अब स्पष्ट करना होगा, कि सत्ता मिलने के बाद शहर के लिए उनका एजेंडा क्या होगा, क्योंकि जनता सिर्फ चेहरे नहीं, शहर का भविष्य चुनने जा रही है।