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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 जुलाई 2026। साहित्यिक पत्रकारिता भासा नै बणावण रौ महताऊ काम करै । अेक संपादक माथै भासा री संरचना अर स्वायत्ता नै बचावण री दोवड़ी जिम्मेदारी है इण सारु उणनै भासा, साहित्य अर व्याकरण री जाणकारी होवणी ई चाहीजै । वरतमान साहित्यिक पत्रकारिता नै सोसियल मीडिया सूं मोटो खतरौ है क्यूंकै सोसियल मीडिया हिंसा री बात करै जद कै साहित्यिक पत्रकारिता अहिंसा री साख भरै। इणी ‘ज कारण लोग सोसियल मीडिया रै बजाय साहित्यिक पत्रकारिता माथै ज्यादा भरोसो करै। अै विचार साहित्य अकादेमी में राजस्थानी संयोजक अर ख्यातनाम कवि-आलोचक प्रोफेसर (डाॅ.) अर्जुनदेव चारण साहित्य अकादेमी अर डाॅ. भगवानदास किराड़ू नवीन समिति कांनी सूं बीकानेर में आयोजित ‘ राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता ‘ विसयक अेक दिवसीय राष्ट्रीय ग्यांन-गोष्ठी रै उदघाटन सत्र में व्यक्त करिया। वे कह्यौ कै साहित्यिक पत्रकारिता भासा रै मानक रूप नै थरपण रौ महताऊ काम करै। उदघाटन सत्र रा सिरै मिजमान मधु आचार्य आशावादी राजस्थानी साहित्यिक पत्रिकावां रै इतिहास अर प्रकासण री जाणकारी देता थकां कह्यौ कै समाज में युवा लिखारा नै आगै बधावण में साहित्यिक पत्रिकावां री महताऊ भूमिका रेवै इण सारु राजस्थानी पत्र-पत्रिकावां नै पोखण री महत्ती दरकार है । साहित्य अकादेमी रा उप-सचिव एन. सुरेश बाबू सगळा रचनाकारां रौ स्वागत करता थकां कह्यौ कै राजस्थानी अेक सिमरध अर सुतंत्र भासा है जिण नै संवैधानिक मान्यता मिलणी ई चाहीजै।
संगोष्ठी संयोजक नगेंद्र नारायण किराडू बतायौ कै पैला सत्र री अध्यक्षता करता थकां प्रतिष्ठित कवि-आलोचक अर संपादक डाॅ. कुंजन आचार्य कह्यौ कै नवी पीढी आपरी मायड़ भासा नै भूल रैयी है इण सारु प्रदेस रा टाबरा नै प्राथमिक शिक्षा आपरी मायड़ भासा में देवण री दरकार है। वे राजस्थानी साहित्यिक पत्रिकावां नै ऑनलाइन चढावण री सबळी सीख रै सागै ई पत्रिकावां रै प्रकासण अर डाक खरच री बधती महंगाई माथै चिंता प्रकट करी। सत्र मांय युवा रचनाकार महेन्द्रसिंह नरावत ‘ राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता री सामाजिक भूमिका ‘ विसयक महताऊ शोध आलेख प्रस्तुत करियौ।
दूजै सत्र री अध्यक्षता करता थकां प्रतिष्ठित कवि-आलोचक डाॅ. गजेसिंह राजपुरोहित राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता री आलोचनात्मक दीठ सूं विगतवार जाणकारी देता थकां कह्यौ कै साहित्यिक पत्रकारिता समाज में वैचारिक चेतना रौ सबळौ माध्यम होवै। इण अवसर माथै राजस्थानी शोध अर साहित्यिक पत्रिकावां रै अंतरगत जागती-जोत, राजस्थली, कथेसर, बिणजारो, परम्परा, वैचारिकी आद री विरोळ करता थकां डाॅ.राजपुरोहित वांरै महताऊ योगदान नै ई उजागर करियौ । युवा कवि-कथाकार अर संपादक डाॅ.नमामी शंकर आचार्य ‘ राजस्थानी साहित्यिक पत्रिकावां मांय संपादक री समस्यावां ‘ विसयक महताऊ शोध आलेख प्रस्तुत करियौ । इणी भांत राजस्थानी रचनाकार अर संपादक धीरेंद्र आचार्य ‘ राजस्थानी साहित्यिक पत्रिकावां अर बाजार ‘ विसयक महताऊ शोध आलेख में इण बात रो विगतवार खुलासो करियौ कै वरतमान में बाजार राजस्थानी भासा, साहित्य, संस्कृति अर लोक री जीवण शैली नै किण भांत प्रभावित करै ।
समापन समारोह रा अध्यक्ष प्रतिष्ठित कवि-कथाकार अर संपादक रामस्वरूप किसान कह्यौ कै संपादन रौ काम लेखन सूं ज्यादा अबखौ है क्यूंकै वो अेक लेखक रौ लेखन खाय जावै । वे कथेसर मांय आपरै अणभव नै उजागर करता थका आ बात ई कैयी कै संपादक असल में अेक लेखक अर पाठक रै बिचाळै पूळ रौ काम करै । समापन सत्र रा सिरै मिजमान प्रतिष्ठित कवि, पत्रकार अर संपादक डाॅ.राजेश कुमार व्यास कह्यौ कै राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता मांय कैई महताऊ पत्रिकावां सांमी आवै पण न्यारी – न्यारी समस्यावां रै कारण वै बंद होयगी। वे कह्यौ कै संपादक बड़ौ निरमम हुवै पण जे चोखो मैटर अर आरथिक पख सूं मजबूती व्है तो कोई पत्रिका बंद नीं होवै। राजस्थानी साहित्यिक पत्रकारिता री विगतवार विवेचना करता थकां वे आ बात ई कैयी कै अेक कुसल संपादक नै भासायी अर सांस्कृतिक सबदां री समझ होवणी जरूरी है । छैकड़ समापन माथै ग्यांन-गोठ रा संयोजक नगेंद्र नारायण किराड़ू साहित्य अकादेमी अर मौजूद रचनाकार अर मायड़भासा प्रेमियां रौ अंतस सूं आभार ग्यांपित करियौ । इण ग्यांन-गोठ रै च्यारुं ई सत्रां रौ संचालन कवि-कथाकार संजय पुरोहित करियौ।
इण अंजसजोग आयोजन में प्रतिष्ठित रचनाकार मालचंद तिवाड़ी, कमल रंगा, डॉ.प्रशान्त बिस्सा, डॉ.अजय जोशी, डॉ.नृसिंहबिनाणी, अनुराग हर्ष, अब्दुल शकुर सिसोदिया, इसरार हसन कादरी, असद अली असद प्रशान्त कुमार जैन, डॉ.गोरीशंकर प्रजापत, योगेन्द्र कुमार पुरोहित, राजेश चौधरी, हिमांशु टाक, सत्यनारायण सिंह राजपुरोहित, सुभांगी सुथार, नंदनी श्रीमाली, जाग्रति भोजक, विनिता शर्मा, उत्कर्ष किराडू, अरविन्द भादाणी, शिव दाधीच, उमा शर्मा अर अशोक आचार्य रै सागै कैई प्रतिष्ठित रचनाकार, मायड़भासा अर साहित्यप्रेमी मौजूद रैया ।