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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 अप्रैल 2026। क्षेत्र के सबसे बड़े हनुमानजी धाम पूनरासर हनुमानजी मंदिर के नवनिर्माण का सपना देख रहे श्रृद्धालुओं को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि कोलकाता ट्रस्ट द्वारा बनाए जा रहे मंदिर के निर्माण कार्य पर न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई है। इस संबध में मंदिर के वंशानुगत पुजारी परिवार द्वारा श्रीडूंगरगढ़ एसीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया गया था एवं गत 20 मार्च 2026 को राजनैतिक प्रभाव के साथ मंदिर प्रांगण में जबरन शीला पूजन करने का आरोप लगाया था। परिवादी पक्ष ने 300 वर्ष पहले जयरामदा बोथरा द्वारा मंदिर मूर्ति की प्रतिष्ठा करने से लेकर अभी तक के इतिहास का उल्लेख करते हुए वंशानुगत रूप से बोथरा परिवार के वंशजों द्वारा ही पुजारी के रूप में मंदिर की सेवा पूजा करने, समय समय पर मंदिर निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाने, मरम्मत करवाने आदि कार्यों के लिए कानूनी रूप से अधिकृत एवं मान्य बताया। मंदिर की भूमि का 13876 दरगज भूमि का पट्टा भी पुजारियों के प्रार्थना पत्र पर जारी किए जाने का उल्लेख भी किया गया है। एवं प्रतिवादियों द्वारा अपंजीकृत, अवैधानिक, अनाधिकृत, अवैध ट्रस्ट डीड बना कर बिना किसी अधिकार के जबरन निर्माण करवाने का आरोप लगाया है। वादी पुजारी परिवार के अधिवक्ता बाबूलाल झेडू ने बताया कि न्यायालय इस बात से सहमत हुआ कि प्रतिवादी गण सामान्य भक्तजन की तरह मंदिर में दर्शन करने के अधिकारी है एवं कोई भी भक्त मंदिर निर्माण के लिए अपना सहयोग दे सकता है, परंतु किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकता। ऐसे में न्यायालय द्वारा प्रार्थी पक्ष द्वारा निवेदित आदेश आंशिक रूप से स्वीकार कर प्रतिवादियों को मंदिर परिसर में कोई पक्का नवनिर्माण नहीं करवाने एवं कोई सारभूत परिवर्तन नहीं कर उसकी यथास्थिति बनाए रखने के लिए पांबद किया गया है। हालांकि न्यायालय ने मंदिर के पास के बाड़े में मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने के कार्य पर रोक नहीं लगाई गई है।
यह है कोलकाता ट्रस्ट के ट्रस्टी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। पुजारी परिवार द्वारा न्यायलय में दाखिल किए गए वाद में श्री पूनरासर हनुमानजी ट्रस्ट कोलकाता एवं उसके अध्यक्ष भीखमचंद पुगलिया, मनोज जैन, रामरतन मल, जुगराज सिरोहियां, महावीर प्रताप दुग्गड़, भरत कुमार नाहटा, बालचदं दुगड़, भीखमचंद डोसी, हंसराज बांठिया, धनपत नाहटा, संजय नाहटा, सुमेरमल सुराणा एवं बीकानेर निवासी सम्पत पारीक, मोटूमल हर्ष एवं पूनरासर निवासी बजरंगलाल सारस्वत को प्रतिवादि बनाया गया है। न्यायालय ने इन सभी को मंदिर में यथास्थिति बनाए रखने के लिए पांबद किया है।
यह है नवनिर्माण का मसला।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में लाखों भक्तों की आस्था के केन्द्र पूनरासर हनुमानजी मंदिर के नवनिर्माण का विवाद लंबे समय से चल रहा है। यहां पर अभी तक पूजारी परिवार द्वारा विभिन्न निर्माण कार्य करवाए जाते रहे है एवं वर्ष 1981 में पुजारियों को ही मंदिर का पट्टा बना कर दिया गया था। पुजारियों द्वारा भक्तों के सहयोग से मंदिर में पहले 125 कोटडियों का निर्माण करवाया हुआ था एवं उनके जर्जर होने के बाद 78 कमरों का निर्माण भी उनके स्थान पर किया हुआ है। मंदिर की व्यवस्थाओं को और अधिक सुचारू चलाने के लिए वर्ष 2004 में पुजारी परिवार द्वारा मंदिर श्री पूनरासर हनुमानजी पुजारी ट्रस्ट का गठन भी किया गया था एवं इस ट्रस्ट द्वारा भव्य मंदिर के निर्माण की योजना भी बनाई हुई है। हालांकि विभिन्न श्रृद्धालुओं द्वारा भी अलग अलग नाम से संस्थाएं, समितियां, ट्रस्ट, मंडल बनाए हुए है, जो कि विभिन्न आयोजन तो पूनरासर हनुमानजी की आस्था से करते रहते है, परंतु मंदिर प्रबंधन में किसी संस्था का कोई हस्तक्षेप नहीं रहा है।