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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 मार्च 2026। होली और चंद्रग्रहण के कारण सामान्य जनमानस व गांव गुवाड़ में होलिका दहन को लेकर भ्रांति का माहौल छाया है। ऐसे में अनेक श्रद्धालुओं के आग्रह पर पंडित विष्णुदत्त शास्त्री द्वारा शंका समाधान किया जा रहा है। पढें पूरी जानकारी:-
संवत् 2082 फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के दिन 2 मार्च 2026 को प्रदोष काल में पूर्णिमा और सम्पूर्ण रात्रि में भद्रा व्याप्त रहेगी। अगले दिन पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है, किन्तु पूर्णिमा की व्याप्ति साढ़े तीन प्रहर से अधिक है और प्रतिपदा तिथि वृद्धिगामी है। इसलिए शास्त्र वचन के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा के दिन 3 मार्च 2026 बुधवार को होना चाहिए था, परन्तु 3 मार्च के दिन ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण है। ग्रहणकाल तथा प्रदोष से पूर्व पूर्णिमा तिथि समाप्त हो रही है, ऐसी स्थिति में धर्म सिंधु के अनुसार होलिका दहन पूर्व दिन ही करना चाहिए। दूसरे दिन ग्रस्तोदय ग्रहण हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा न हो तो पूर्व दिन ही होलिका दहन पूजन करें। साढ़े तीन प्रहर से अधिक पूर्णिमा और प्रतिपदा वृद्धिगामी होते हुए भी धर्म सिंधु में दिए हुए ग्रहण विचार के वचनानुसार होलिका दहन 2 मार्च 2026 को प्रदोष काल में करना ही शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन भद्रा शाम 5:56 से मध्य रात्रि के बाद रात्रि शेष 3 मार्च सुबह 5:29 तक रहेगी। भद्रा के संबंध में शास्त्रों में लिखा गया है, कि यदि भद्रा निशीथकाल ( मध्य रात्रि ) के बाद तक रहें तो फिर भद्रा में ही प्रदोष के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका दहन करें। इस वर्ष प्रदोष में भद्रा का मुख नहीं रहेगा, इससे 2 मार्च को प्रदोष वेला सूर्यास्त से 2 घंटे 24 मिनट तक के समय में ही होलिका दहन करना शास्त्रोक्त है। यहां 2 मार्च की शाम 8.15 बजे होलिका दहन करना मंगल होगा। छारण्डी (धुलंडी) 3 मार्च को है।
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार को ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण होगा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, और अमेरिका के क्षेत्रों में दिखाई देगा। अर्जेंटीना पैराग्वे के कुछ हिस्से, बोलीविया, ब्राजील, ग्रीनलैंड, और उत्तरी अटलांटिक महासागर में उपछाया प्रवेश का प्रारंभिक चरण चन्द्रास्त में समय दिखाई देगा। वहीं रूस, कजाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिन्द महासागर में ग्रहण की उपछाया का अंत चन्द्रोदय के समय दिखाई देगा।
भारत में सूतक :- 3 मार्च की प्रातः 6:20 बजे इसका सूतक प्रारम्भ हो जाएगा।
ग्रहण आरम्भ:- ( स्पर्श ) शाम 3:20 बजे से
ग्रहण समाप्त:- ( मोक्ष ) शाम 6:48 बजे को होगा।
ग्रहण का राशियों पर प्रभाव।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। यह चंद्र ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र तथा सिंह राशि में हो रहा है। अतः इस नक्षत्र एवं राशि में जातकों को ग्रस्तोदय ग्रहण का विशेष रूप से अशुभ एवं कष्टकारी होगा। जिस राशि के लिए ग्रहण का फल अशुभ कहा गया है उसे यथाशक्ति जप- पाठ ग्रह- राशि ( चंद्रमा एवं राशि स्वामी सूर्यकी ) एवं दानादि द्वारा अशुभ प्रभाव को क्षीण किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ग्रहण उपरान्त औषधि स्नान करने से भी अनिष्ट की शांति होती है, जिस राशि में ग्रहण होता है उस राशि वाले को उपाय अवश्य करना चाहिए।
राशियों के लिए फल:-
1. मेष:- व्यय की अधिकता, व्यर्थ परिश्रम
2. वृषभ:- कार्य सिद्धि, धनलाभ
3. मिथुन:- प्रगति , उत्साह, पुरुषार्थ वृद्धि
4. कर्क :- धनहानि, अपव्यय
5. सिंह:- शरीर को कष्ट, चोट भय, धन हानि
6. कन्या :- धनहानि, कष्ट
7. तुला :- धन , सुख लाभ
8. वृश्चिक:- रोग , कष्ट, चिंता भय, संघर्ष
9. धनु:- सन्तान संबंधी चिंता
10. मकर :- शत्रु व दुर्घटना का भय, व्यय की अधिकता
11. कुंभ :- जीवनसाथी को कष्ट
12. मीन:- रोग, गुप्त चिंता , कार्य में विलंब