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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 दिसम्बर 2025। देश के बंटवारे ने सिंध प्रांत के सिंधी समुदाय से उनकी जमीन तो छीन ली लेकिन सिंधी समुदाय ने अपनी जीवटता से अपनी भाषा, पंरपरा, विरासत एवं संस्कृति को आज भी जिंदा रखा है। अपना वजूद कायम रखने की सिंधी समाज की इस प्रेरणीय खासीयत को पर्व के रूप में मनाने के लिए विश्व भर में दिसम्बर के पहले रविवार को सिंधी कल्चर-डे मनाया जाता है एवं इसी पर्व को रविवार को श्रीडूंगरगढ़ में भी उत्साह से मनाया गया। सिंधी समाज के मीडिया प्रभारी रवि रिझवानी ने बताया कि इस मौके पर झूलेलाल मंदिर में समाज के लोगों ने पांरपरिक टोपी व अरजक पहन कर भजन, संगीत व नृत्य की प्रस्तुतियां दी। इस दौरान सभी ने अपनी भाषा, परंपरा, विरासतों एवं संस्कृति को संरक्षित रखने, आगामी पिढ़ी तक पहुंचाने का झूलेलालजी के जयकारों के साथ संकल्प दोहराया। मीनाक्षी मोरवानी ने बताया कि शाम 5 बजे से 6 बजे तक विशेष सत्संग कार्यक्रम आयोजित किया गया एवं महाप्रसाद में पंरपरागत प्रसाद वितरण के साथ से कार्यक्रम पूर्ण हुआ।