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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 अक्टूबर 2025। आज गोपाष्टमी का पर्व है और भारतीय परंपरा में विशिष्ट रूप से मनाया जाता है। देश भर में गौपूजन के आयोजन संपन्न हुए है, ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ में एक ऐसे गौ सेवक है, जो जीवन में प्रतिदिन पूजा के समान गौ सेवा को महत्व देते हुए सुबह शाम निरंतर 8 साल से सेवारत है। वे किसी प्रचार से दूर है और प्रतिदिन नि:स्वार्थ गौसेवा में अपना योगदान दे रहें है। ये सेवाभावी कस्बे के आड़सर बास निवासी हुकुमचंद प्रजापत है। हनुमान धोरा पर निराश्रित गौवंश के लिए स्थित खुली गौशाला में हुकुमचंद सेवा कर रहें है। दोनों समय करीब दो दो घंटे से अधिक वे गौसेवा में दे रहें है। यहां तक की अपनी पुत्री के विवाह के दिन भी उन्होंने गौवंश को चारा पानी देने की सेवा पूर्ण की। हनुमान धोरा पुजारी शिवभगवान सिखवाल ने बताया कि बिना किसी स्वार्थ के निराश्रित गौवंश के सेवक हुकुमचंद अपने नियम के इतने पक्के है कि गत 8 वर्षों में रामदेवरा पदयात्रा के अतिरिक्त कभी अवकाश नहीं लिया। यात्रा के दौरान अपने पुत्रों को जिम्मेदारी देकर जाते है। सर्दी गर्मी हो या बरसात वे हर मौसम में दोनों समय निराश्रित गौवंश की सेवा का कार्य पूरा करते है। वे टैक्सी से हनुमान धोरा पहुंचते है और गौवंश को चारा, पंछियों को चुग्गा बरसाने की सेवा करते है। संस्कृत विद्यालय के प्राचार्य गोविंद शर्मा ने बताया कि गौसेवा के लिए पूरी तरह से निष्ठावान होकर हुकुमचंद बिना अवकाश नि:स्वार्थ सेवा का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि आस पास के खेतों से एक एक झाल चारा यहां दान आता है, इसके अतिरिक्त अनेक दानदात भी चारा देते है, वहीं कभी कभी तो हुकुमचंद अपनी जेब से भी खर्च कर चारा भी डलवाते है। करीब आठ वर्ष पूर्व यहां निराश्रित गौवंश के लिए चारा पानी की व्यवस्था प्रारंभ की गई थी। चार पांच गौवंश से प्रारंभ हुआ ये प्रकल्प आज 70-80 गौवंश तक पहुंच गया है। बता देवें हुकुमचंद अपने परिवार का पालन अपने घर में बनी एक दुकान से कर रहें है। उनके दो बेटे है और दोनों ही सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहें है। हुकुमचंद कहते है कि बेटों की नौकरी लग जाए तो वे पूरा समय गौसेवा में ही देंगे। उनकी निष्ठा देखकर अपने खेतीहर लोग भी प्रभावित है।