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October 17, 2026
6-sep
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 सितंबर 2025। पढें आज का पंचांग ओर देखें दिन भर का शुभ-अशुभ समय।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 06-Sep-2025
☀ Sri Dungargarh, India

🔅 तिथि चतुर्दशी 01:43 AM
🔅 नक्षत्र धनिष्ठा 10:56 PM
🔅 करण गर, वणिज 02:33 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग अतिगंड 11:52 AM
🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:14 AM
🔅 चन्द्रोदय 06:04 PM
🔅 चन्द्र राशि मकर 11:22 AM
🔅 चंद्र वास दक्षिण 11:22 AM
🔅 सूर्यास्त 06:50 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:32 AM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 12:35:32
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:07 PM 12:57 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:14 AM 07:04 AM
🔅 कंटक 12:07 PM 12:57 PM
🔅 यमघण्ट 03:28 PM 04:18 PM
🔅 राहु काल 09:23 AM 10:57 AM
🔅 कुलिक 07:04 AM 07:55 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 01:47 PM 02:38 PM
🔅 यमगण्ड 02:06 PM 03:41 PM
🔅 गुलिक काल 06:14 AM 07:48 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅 काल 06:14 AM – 07:49 AM
🔅 शुभ 07:49 AM – 09:23 AM
🔅 रोग 09:23 AM – 10:57 AM
🔅 उद्वेग 10:57 AM – 12:32 PM
🔅 चल 12:32 PM – 02:06 PM
🔅 लाभ 02:06 PM – 03:41 PM
🔅 अमृत 03:41 PM – 05:15 PM
🔅 काल 05:15 PM – 06:49 PM
🔅 लाभ 06:49 PM – 08:15 PM
🔅 उद्वेग 08:15 PM – 09:41 PM
🔅 शुभ 09:41 PM – 11:06 PM
🔅 अमृत 11:06 PM – 00:32 AM
🔅 चल 00:32 AM – 01:57 AM
🔅 रोग 01:57 AM – 03:23 AM
🔅 काल 03:23 AM – 04:49 AM
🔅 लाभ 04:49 AM – 06:14 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 04:48 AM समाप्त: 07:05 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 07:05 AM समाप्त: 09:21 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 09:21 AM समाप्त: 11:40 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 11:40 AM समाप्त: 01:59 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 01:59 PM समाप्त: 04:03 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 04:03 PM समाप्त: 05:46 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 05:46 PM समाप्त: 07:15 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:15 PM समाप्त: 08:40 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 08:40 PM समाप्त: 10:16 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 10:16 PM समाप्त: 00:13 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 00:13 AM समाप्त: 02:28 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 02:28 AM समाप्त: 04:48 AM

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।

शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।

शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।

🌼 अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी व्रत कथा

महाराज युधिष्ठिर ने एक बार राजसूय यज्ञ किया था और यज्ञ मंडप का निर्माण बहुत ही सुंदर और अद्भुत तरीके से कराया गया था। यज्ञ के मंडप में जल की जगह स्थल तो स्थल की जगह जल की भ्रांति होती थी। इसी के चलते दुर्योधन एक स्थल को देखकर जल कुण्ड में जाकर गिर गए। जब द्रौपदी ने यह देखा तो उनका उपहास करते हुए बोलीं कि अंधे की संतान भी अंधी होती है। इस कटुवचन को सुनकर दुर्योधन बहुत आहत हो गए और अपने अपमान का बदला लेने हेतु उसने युधिष्ठिर को द्युत यानी जुआ खेलने के लिए बुला लिया। वहां, छल से जीत हासिल करके पांडवों को 12 वर्ष का वनवास दे दिया।
वन में रहते वक्त उन्हें अनेक प्रकार के कष्टों को सहना पड़ा। फिर एक दिन वन में भगवान कृष्ण युधिष्ठिर से मिलने के लिए गए। तब युधिष्ठिर ने उन्हें अपना सब हाल विस्तार से बताया और इस विपदा से निकलने का मार्ग दिखाने के लिए कहा। इसके उत्तर में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी का व्रत करने को कहा। उन्होंने व्रत के बारे में बताया कि इसे करने से खोया हुआ राज्य भी प्राप्त हो जाएगा। वार्तालाप करने के बाद कृष्णजी युधिष्ठिर को एक कथा सुनाने लगते हैं।
उन्होंने कहा, प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था और उसकी एक सुशीला नामक कन्या थी। जब कन्या बड़ी हो गई तो ब्राह्मण ने कौण्डिन्य ऋषि से उसका विवाह कर दिया। विवाह संपन्न होने के बाद कौण्डिन्य ऋषि अपने आश्रम की तरफ चल लगे। मार्ग में रात होने पर वह नदी किनारे आराम करने रहे थे। तभी सुशीला के पूछने पर उन्होंने अनंत व्रत का महत्व बताया। इसके बाद, सुशीला ने उसी स्थान पर व्रत का अनुष्ठान कर 14 गांठों वाला डोरा अपने हाथ में बांध लिया। इसके बाद, वह अपने पति के पास आ गई।कौण्डिनय ऋषि ने सुशीला के हाथ में डोरे बंधे देखा तो उसके बारे में पूछने लगे। तभी सुशीला ने उन्हें सारी बात बता दी। लेकिन कौण्डिनय ऋषि सुशीला की बात सुनकर बिल्कुल भी प्रसन्न नहीं हुए और उसके हाथ में बंधे डोर को भी आग लगाकर जला दिया। जिससे अनंत भगवान का अपमान हुआ और इसके परिणामस्वरूप कौण्डिनय ऋषि की सारी संपत्ति नष्ट हो गई। सुशीला ने इसके पीछे का कारण डोर का आग लगाना बताया। इसके बाद, ऋषि पश्चाताप की अग्नि में जलते हुए अनंत भगवान की खोज में वन की ओर निकल गए। वहां भटकते-भटकते वह निराश होकर गिर पड़े और बेहोश हो गए।

भगवान अनंत ने उन्हें तब दर्शन दिया और कहा कि मेरे अपमान के कारण ही तुम्हारी यह दशा हुई और सारी विपत्तियां आई। लेकिन अब तुम्हारे पश्चाताप से मैं प्रसन्न हूं और अब तुम अपने आश्रम में वापस जाओ और 14 साल तक मेरे इस व्रत को विधि-विधान से करो। ऐसा करने से तुम्हारे समस्त कष्ट दूर हो जाएंगे। इसके बाद कौण्डिनय ऋषि ने वैसा ही किया जैसा भगवान ने कहा था। इससे उनके सभी कष्ट दूर हो गए और उन्हें मोक्ष भी प्राप्त हो गया। युधिष्ठिर ने भी श्रीकृष्ण की आज्ञा से अनंत भगवान का व्रत किया। जिससे महाभारत के युद्ध में पांडवों को जीत प्राप्त हुई।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026