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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 23 नवम्बर 2020। “कोरोना से मृत्यु के बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए कंधा नसीब नहीं होना” इन हालातों की आम चर्चा हम सब कुछ दिन पहले इटली में और बाद में बड़े शहरों के बारे में सुन रहे थे। सोमवार को ये हालात श्रीडूंगरगढ़ शहर में भी देखने को मिले है। यहां लगातार बढ़ रहे कोरोना और पिछले दिनों हुई मृत्यु के रिकॉर्ड के बाद क्षेत्रवासी भयभीत है। ये भय कस्बे में भी आज सामने आया और यहां सोमवार को ही एक 75 वर्षीया वृद्धा के निधन के बाद उन्हें कंधा देने वाला कोई नहीं मिला। मजबूरी में वृद्धा के दो पुत्रों ने चिकित्साकर्मियों एवं पालिकाकर्मियों के सहयोग से दाह संस्कार किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार कस्बे के कालूबास में वार्ड 27 निवासी 75 वर्षीया धन्नीदेवी राखेचा की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें बीकानेर ले गए। बीकानेर पीबीएम चिकित्सालय में उनकी कोविड जांच की गई एवं कोरोना संक्रमित आने के बाद वे कोविड हास्पीटल में जाने के बजाए अपने घर आ गए। 20 नवम्बर को वो घर आ गए तो चिकित्सा विभाग ने कोरोना संक्रमित का प्रोटोकाल भी उनके घर पर लागू करवाया। आज 23 नवम्बर सोमवार को धन्नीदेवी का निधन हो गया। इस पर श्रीडूंगरगढ़ चिकित्सालय के डाक्टर ओमप्रकाश स्वामी, नर्स प्रदीप पांडे उनके घर पहुंचें व जांच कर उन्हें मृत घोषित किया। उनके परिवार में मृतका के केवल दो पुत्र ही मौजूद थे एवं अंतिम संस्कार के लिए कोई भी पड़ौसी या परिचित मौके पर नहीं पहुंचा। ऐसे में मृतका के शव को नागरिक विकास परिषद के शववाहन में श्मशान घाट ले जाया गया। वहां पालिकाकर्मियों ने पीपीई कीट पहन कर मृतका के पुत्रों का सहयोग करते हुए अंतिम संस्कार करवाया। इस दौरान चिकित्सा विभाग के प्रदीप पांडे, राजेश, नवरत्न, सुभाष आदि भी मौजूद रहे।