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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 फरवरी 2025। किसानों के लिए खास खबर कृषि विभाग की ओर से आई है। जिले में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं के मद्देनजर उद्यान विभाग द्वारा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) कम्पोनेंट ‘बी’ के तहत कृषकों को हाईटेक सिंचाई के लिए तीन, पांच व साढ़े सात हॉर्स हॉर्स पम्प क्षमता तक स्टैण्ड अलोन सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र अनुदान पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं।
योजना का उद्देश्य ऐसे कृषक, जिनके पास सिंचाई के लिए कृषि विद्युत कनेक्शन नही हैं एवं सिंचाई के लिए डीजल चलित संयंत्र अथवा अन्य वैकल्पिक साधन पर निर्भर हैं, उन्हें सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र अनुदान पर उपलब्ध करवाया जाना है।
उपनिदेशक (उद्यान) रेणु वर्मा ने बताया योजना का लाभ लेने के लिए कृषक के पास न्यूनतम 0.4 हैक्टेयर का भू-स्वामित्व होना आवश्यक है। अधिसूचित अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के जनजाति किसानों के लिए 3 व 5 हॉर्स क्षमता के पम्प संयंत्रों हेतु न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर का भू-स्वामित्व होना आवश्यक है। कार्यदायी फर्म द्वारा तकनीकी सर्वे के आधार पर पम्प क्षमता का निर्धारण किया जाएगा। तकनीकी सर्वे के अनुसार कृषक द्वारा आवेदित पम्प क्षमता में बदलाव किया जा सकेगा। वांछित योजना में प्रगति देने हेतु फरवरी अंत तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, जिससे पूर्व आवंटित लक्ष्य 7 हजार में से शेष 4 हजार लक्ष्य को समय पर पूर्ण किया जा सके।
कृषि अधिकारी (उद्यान) मुकेश गहलोत ने बताया कि अनुदान के लिए किसानों को राज किसान साथी पोर्टल पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाईन आवेदन करना है। आवेदन के साथ कृषक का जनआधार कार्ड, भूमि की जमाबंदी या पासबुक की प्रतिलिपि (भू-स्वामित्व), सिंचाई जल स्त्रोत ऑनलाईन स्वघोषित, विद्युत कनेक्शन न होने का शपथ ऑनलाईन स्वघोषित इत्यादि ऑनलाइन प्रस्तुत किया जाना है। स्टेण्ड अलोन सौर ऊर्जा पम्प परियोजना में पीएम कुसुम कम्पोनेंट बी के तहत 60 प्रतिशत (30 प्रतिशत केन्द्रीय मद तथा 30 प्रतिशत राज्य मद) अनुदान देय होगा। योजना के तहत अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के कृषकों को राज्य मद से 45 हजार रुपए प्रति कृषक प्रति संयंत्र अतिरिक्त अनुदान देय है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 7.5 एचपी क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों पर ही अनुदान का प्रावधान किया गया है। यदि कृषकों द्वारा इससे अधिक क्षमता का 10 एचपी का पम्प स्थापित करवाया जाता है, तो समस्त अन्तर राशि कृषक द्वारा वहन ही वहन की जाएगी। कृषक द्वारा कृषक हिस्सा राशि कुल लागत का शेष 40 प्रतिशत राशि स्वयं वहन की जाएगी। कृषक द्वारा वहन की जाने वाली लागत की 40 प्रतिशत राशि में से 30 प्रतिशत तक की राशि का, कृषक बैंक ऋण भी प्राप्त कर सकता है।
योजना प्रभारी जोधराज ने बताया कि इस योजना के तहत वे किसान पात्र होंगें, जो कृषि एवं उद्यानिकी फसलों में सिचाई हेतु ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर, माइको स्प्रिंकलर या स्प्रिंकलर संयंत्र काम में ले रहे हैं। उच्च उद्यानिकी तकनीक जैसे ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस और लो-टनल्स आदि लेने वाले कृषक भी पात्र होगे। कृषक द्वारा जलस्त्रोत होने व डीजल चलित संयंत्र से सिंचाई करने का स्वःघोषित शपथ-पत्र प्रस्तुत करने पर, योजना का पात्र माना जायेगा। विद्युत कनेक्शन विहीन कृषक द्वारा उसके भू-स्वामित्व में सिचाई हेतु जल संग्रहण ढांचा, डिग्गी, फार्म पौण्ड व जलहौज निर्मित हो तो, कृषक द्वारा शपथ-पत्र प्रस्तुत करने पर योजना हेतु पात्र माना जाएगा। योजना में यथासम्भव लघु एवं सीमान्त कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिन कृषकों के पास कृषि विद्युत कनेक्शन हैं या सौर ऊर्जा पम्प संयंत्र परियोजना अन्तर्गत अनुदान प्राप्त कर लिया है, ऐसे कृषक इस योजनान्तर्गत पात्र नहीं होंगे। विद्युत विभाग में कृषक द्वारा कृषि विद्युत कनेक्शन आवेदन होने की स्थिति में, आवेदित कृषक द्वारा स्वयं की सहमति से विद्युत कनेक्शन आवेदन को समर्पित करने पर, योजना में पात्र माना जाएगा।