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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 20 जनवरी 2025। उद्यानिकी नवाचार से जुड़ी ये खबर कृषि विभाग से आई है। उद्यान विभाग के उपनिदेशक रेणु वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में ड्रिप सिंचाई पद्धति की उत्तरोत्तर वृद्धि, कृषक रूझान, उच्च तकनीक उद्यानिकी की माँग तथा ड्रिप पद्धति पर आदर्श उत्पादकता एवं गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए उद्यानिकी नवाचार-सूक्ष्म सिंचाई ऑटोमेशन व फर्टिगेशन जल विलेय उर्वरक सपोर्ट परियोजना प्रारम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि उन्नत उद्यानिकी तकनीक के मद्देनजर ड्रिप, फर्टीगेशन, फोगर, फिल्टर्स, वाल्वस व अन्य तकनीकी युक्तियों का स्वचालन (ऑटोमेशन) आवश्यक है। ऑटोमेशन में कंट्रोलर, सेन्सर, सोलोनाइड वाॅल्व, फिल्टर्स व अन्य युक्तियों के माध्यम से ड्रिप सिंचाई संयंत्रों का स्वचालन किया जाएगा। फर्टिगेशन तकनीक में फसल को वांछित पोषक तत्वों की आपूर्ति ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के साथ ही जल विलेयक उर्वरक या तरल उर्वरक द्वारा सीधे ही प्रभावी जड़ क्षेत्र में की जाती है। कृषि अधिकारी उद्यान मुकेश गहलोत ने बताया कि फर्टिगेशन हेतु आपूर्तित उर्वरक या रसायन तथा ऑटोमेशन इकाई पर विभाग द्वारा जिले में पहली बार अनुमोदित दर का 75 प्रतिशत अनुदान किसान की संस्तुति पर सम्बन्धित कार्यदायी फर्म को दिया जाएगा।
कृषक पात्रता के मापदण्ड। 

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। योजना का लाभ लेने के लिए कृषक के पास भू-स्वामित्व या भू-लीज (न्यूनतम 10 वर्ष एवं सक्षम स्तर से पंजीकृत) हो, फर्टिगेशन हेतु कृषक के यहां ड्रिप सिंचाई संयंत्र स्थापित होना आवश्यक है। ऑटोमेशन में ड्रिप/माइक्रो/मिनी स्प्रिकंलर या फव्वारा सिंचाई संयंत्र स्थापित होने के साथ कृषक के पास स्थायी रूप से सिंचाई का साधन हों। कृषक द्वारा हाईटेक उद्यानिकी के तहत सब्जी/ फूल/ फल-बगीचे/ अन्य फसल ड्रिप संयंत्र पर ली जा रही हो, कृषक परियोजना के तहत विभागीय निर्देशों के अनुसार फर्टिगेशन शेड्यूल अपनाने हेतु सहमत हों। फर्टिगेशन का अनुदान संस्तुतित फसलों पर ही देय होगा। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई ऑटोमेशन पर अनुदान संरक्षित खेती व खुली खेती, दोनों ही प्रकरणों में दिया जाएगा। योजना प्रभारी विजय कुमार बलाई ने बताया कि उद्यान आयुक्तालय जयपुर से प्राप्त निर्देशानुसार किसान ऑनलाईन आवेदन राजकिसान साथी पोर्टल पर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। लक्ष्यों की सीमा तक आवेदन प्राप्त कर, उनका निस्तारण वरिष्ठता के आधार पर ‘‘पहले आओ पहले पाओ‘‘ के अनुसार किया जाएगा, आवेदन पत्र प्रस्तुत करना, आपूर्तिकर्ता फर्म का चयन तथा कृषक हिस्सा राशि जमा करवाना, कृषक द्वारा आपूर्तित किट/ऑटोमेशन इकाई का उपयोग अपनी चयनित भूमि/फसल में ही करना अनिवार्य होगा अन्यथा अनुदान सहायता वापस वसूल कर आवश्यक कानूनी कार्यवाही जिला इकाई स्तर से की जावेगी, संयंत्र का उचित रखरखाव तथा सिफारिश अनुसार उर्वरकीकरण कार्य सम्पन्न करेगा तथा बेचान नहीं करेगा।