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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 22 अक्टूबर 2020।🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

🌻गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020🌻

सूर्योदय: 🌄 06:45
सूर्यास्त: 🌅 17:57
चन्द्रोदय: 🌝 12:30
चन्द्रास्त: 🌜11:01
अयन 🌕 दक्षिणायने (उत्तरगोलीय)
ऋतु: 🌲 हेमंत
शक सम्वत: 👉 1942
विक्रम सम्वत: 👉 2077
मास 👉 आश्विन
पक्ष 👉 शुक्ल
तिथि: 👉 षष्ठी (07:39 तक)
नक्षत्र: 👉 पूर्वाषाढा (24:59 तक)
योग: 👉 सुकर्मा (26:37 तक)
प्रथम करण: 👉 तैतिल (07:39 तक)
द्वितीय करण: 👉 गर (19:12 तक)
अभिजित मुहूर्त 👉 11:58-12:45
राहुकाल 👉 13:45-15:09
दिशाशूल 👉 दक्षिण
चंद्रवास 👉पूर्व
सूर्य राशि 👉 तुला
चंद्र राशि 👉धनु

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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – शुभ =06:45-08:09
२ – रोग =08:09-09:33
३ – उद्वेग =09:33-10:57
४ – चर =10:57-12:21
५ – लाभ =12:21-01:45
६ – अमृत =01:45-03:09
७ – काल =03:09-04:33
८ – शुभ =04:33-05:57

॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – अमृत =05:57-07:33
२ – चर =07:33-09:09
३ – रोग =09:09-10:45
४ – काल =10:45-12:21
५ – लाभ =12:21-01:57
६ – उद्वेग =01:57-03:34
७ – शुभ =03:34-05:10
८ – अमृत =05:10-06:46

महर्षि कात्‍यायन की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर आदिशक्ति ने उनकी पुत्री के रूप में जन्‍म लिया था. इसलिए उन्‍हें कात्‍यायनी कहा जाता है. मां कात्‍यायनी को ब्रज की अधिष्‍ठात्री देवी माना जाता है. पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार गोपियों ने श्रीकृष्‍ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना नदी के तट पर मां कात्‍यायनी की ही पूजा की थी. कहते हैं, मां कात्‍यायनी ने ही अत्‍याचारी राक्षस महिषाषुर का वध कर तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराया था.
मां कात्‍यायनी को पसंदीदा रंग लाल है. मान्‍यता है कि शहद का भोग पाकर वह बेहद प्रसन्‍न होती हैं. नवरात्रि के छठे दिन पूजा करते वक्‍त मां कात्‍यायनी को शहद का भोग लगाना शुभ माना जाता है.
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥

लड़कियों के विवाह में आने वाली बाधा को दूर करने एवं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए निम्न मंत्र का जप करना चाहिए।।
“कात्यायनी महामाये , महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
(पंडित विष्णुदत्त शास्त्री)