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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 28 अक्टूबर 2024। कल मंगलवार को धनतेरस के साथ ही दीपोत्सव प्रारंभ हो जाएगा। पंच दिवसीय दीपोत्सव इस बार 6 दिन का होगा। बाजार में चारों ओर त्योहार की रौनक छाने लगी है। घरों में साफ सफाई का दौर पूरा हो गया है और घरों में सजावटें किए जाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। 29 अक्टूबर, धनतेरस के दिन सिद्ध, त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है, जिसे सिद्ध योग माना जाता है। इस अबूझ मुहूर्त में खरीददारी लाभकारी मानी जाती है। पंडित गोपाल शास्त्री ने बताया कि धनतेरस के दिन धातु खरीदना शुभ माना जाता है। जिसमें सोना, चांदी, तांबा, पीतल, कांसा आदि खरीद सकते है। पंडित विष्णुदत्त शास्त्री ने बताया कि 29 अक्टूबर धनतेरस को प्रदोष काल में शाम 5.53 बजे से रात 8.27 बजे तक पूजन किया जा सकेगा। 30 अक्टूबर को नरक चर्तुदशी मनाएंगे। इस दिन वैधृति योग का संयोग बन रहा है और इसके साथ ही हनुमान जन्मोत्सव भी होगा। इस दिन घर के सामान की खरीददारी श्रेष्ठ रहती है। इस दिन शाम 5.52 बजे से रात 8.27 तक दीपदान का श्रेष्ठ समय होगा। 31 अक्टूबर को रूप चर्तुदशी का पर्व मनाया जाएगा। इस बार प्रीति योग का संयोग रहेगा। इस योग में खरीददारी करना लाभदायक होगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी व गणेशजी की पूजा की जाती है। सुख वैभव और संपत्ति की प्राप्ति होती है। दीपदान के लिए शाम 5.52 बजे से रात 8.26 बजे तक किया जाएगा। इस बार 1 नवबंर को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा। दीपावली के दिन शाम 5.51 बजे से रात 8.26 तक का समय लक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ समय रहेगा। अमावस्या 6.17 मिनिट तक रहेगी। 2 नवबंर को सुबह गोवर्धन पूजा होगी तथा शाम 5.50 बजे से रात 8.25 बजे तक दीपदान का श्रेष्ठ समय होगा। दो नवबंर को ही अन्नकुट महोत्सव भी मनाया जाएगा। 3 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी। यम द्वितीया को दीपदान का समय शाम 5.50 बजे से रात 8.25 बजे तक होगा।

1 नवबंर को ही मनाएंगे दीपावली।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविंद शास्त्री सहित कस्बे के अनेक विद्वानों ने अनेक धर्मग्रंथो का हवाला देते हुए दीपावली एक नवबंर को ही मनाए जाने का आग्रह किया है। गोविंद शास्त्री ने बताया कि संशय की स्थिति में नहीं रहें और दीवाली एक नवबंर को ही मनाना शास्त्र सम्मत है। उन्होंने कहा कि दो दिन अमावस्या हो तो दूसरे दिन की अमावस्या में दीपावली पर्व मनाने के स्पष्ट निर्देश ग्रंथो में दिए है। बिना किसी संदेह के दीप पर्व 1 नवबंर को मनाए।