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October 16, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 मई 2024। श्रीडूंगरगढ़ की साहित्यिक संस्था हिन्दी प्रचार समिति द्वारा एक और बड़ी उपलब्धि भरा कदम उठाया गया है। समिति और उदयपुर जनार्दन राय नागर विवि की बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो गए है। दोनों मिलकर भाषा, साहित्य, संस्कृति और शोध के क्षेत्र में नए कार्य करेंगे। इस दौरान कार्यशालाओं, सेमिनारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा व शोध ग्रंथों का प्रकाशन होगा। समिति अध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि 1961 में स्थापित प्रसिद्ध संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति और उदयपुर के विश्वविद्यालय जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के मध्य गतिविधियों के संचालन के लिए आगामी 5 वर्षो लिए एमओयू पर उदयपुर में हस्ताक्षर किए गए है। विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार डाॅ. तरुण श्रीमाली और समिति की ओर से अध्यक्ष श्याम महर्षि एवं मंत्री रवि पुरोहित ने 8 मई को कुलपति कर्नल प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत की उपस्थिति में समझौता निष्पादित किया।

इन क्षेत्रों में करेंगे संयुक्त कार्य-
– श्रीडूंगरगढ़ की संस्था जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ के सहयोगी संस्थान के रूप में अधिस्वीकृत हुई।
– विश्वविद्यालय और समिति से जुड़े छात्रों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों व अन्य व्यक्तियों के मध्य राजस्थानी व हिन्दी भाषा, साहित्य, इतिहास, पुस्तकालय विज्ञान, पर्यावरण और संस्कृति के अध्ययन, अनुसंधान और प्रसार को मिलेगा बढावा।
– संयुक्त रूप से होगा शोध ग्रंथों का प्रकाशन।
-भाषा, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के लिए कार्यशालाओं, सेमिनारों, सम्मेलनों, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का होगा आयोजन।
– पुस्तकालयों, अभिलेखागारों, सांस्कृतिक अनुरक्षण और ज्ञान के अन्य भण्डारों के विकास, डिजिटलीकरण और रख-रखाव के लिए होंगे अनेक कार्य।

जल्द मिलेगी शोधार्थियों को पीएचडी की सुविधा।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस समझौते के बाद पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को राजस्थानी, हिन्दी, इतिहास, सोशियल साईंस और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों में शोध करने की सुविधा का मार्ग प्रशस्त होगा।

ये रहे एमओयू के साक्षी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर, साहित्यकार किशन दाधीच, डाॅ. चन्द्रेश छतलानी, परीक्षा नियंत्रक डाॅ. पारस जैन, पूर्व रजिस्ट्रार डाॅ. हेमशंकर दाधीच, भगवतीलाल सोनी, जयकिशन चैबे, निजी सचिव केके कुमावत, डाॅ. ललित सालवी, डाॅ. यज्ञ आमेटा, विकास डांगी सहित अनेक अकादमिक सदस्य एमओयू आदान-प्रदान के साक्षी रहे।