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October 16, 2026
15-jan
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 15 जनवरी 2024। श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 15 – Jan – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि पंचमी +02:18 AM
🔅 नक्षत्र :
शतभिषा 08:07 AM
पूर्वाभाद्रपद 08:07 AM
🔅 करण :
बव 03:37 PM
बालव 03:37 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग वरियान 11:10 PM
🔅 वार सोमवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:26 AM
🔅 चन्द्रोदय 10:26 AM
🔅 चन्द्र राशि कुम्भ
🔅 सूर्यास्त 05:59 PM
🔅 चन्द्रास्त 10:21 PM
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1945 शोभकृत
🔅 कलि सम्वत 5125
🔅 दिन काल 10:33 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2080
🔅 मास अमांत पौष
🔅 मास पूर्णिमांत पौष

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:22:19 – 13:04:31
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 01:04 PM – 01:46 PM
🔅 कंटक 09:33 AM – 10:15 AM
🔅 यमघण्ट 12:22 PM – 01:04 PM
🔅 राहु काल 08:46 AM – 10:05 AM
🔅 कुलिक 03:11 PM – 03:53 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:57 AM – 11:40 AM
🔅 यमगण्ड 11:24 AM – 12:43 PM
🔅 गुलिक काल 02:02 PM – 03:21 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ

📜 चोघडिया 📜

🔅अमृत 07:26:54 – 08:46:02
🔅काल 08:46:02 – 10:05:10
🔅शुभ 10:05:10 – 11:24:17
🔅रोग 11:24:17 – 12:43:25
🔅उद्वेग 12:43:25 – 14:02:33
🔅चल 14:02:33 – 15:21:40
🔅लाभ 15:21:40 – 16:40:48
🔅अमृत 16:40:48 – 17:59:55
🔅चल 17:59:55 – 19:40:47
🔅रोग 19:40:47 – 21:21:39
🔅काल 21:21:39 – 23:02:30
🔅लाभ 23:02:30 – 24:43:22
🔅उद्वेग 24:43:22 – 26:24:14
🔅शुभ 26:24:14 – 28:05:05
🔅अमृत 28:05:05 – 29:45:57
🔅चल 29:45:57 – 31:26:48

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 05:24 AM समाप्त: 07:53 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 07:53 AM समाप्त: 09:11 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 09:11 AM समाप्त: 10:40 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:40 AM समाप्त: 12:06 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 12:06 PM समाप्त: 01:42 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 01:42 PM समाप्त: 03:38 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:38 PM समाप्त: 05:53 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 05:53 PM समाप्त: 08:13 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 08:13 PM समाप्त: 10:30 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 10:30 PM समाप्त: अगले दिन 00:46 AM

🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 00:46 AM समाप्त: अगले दिन 03:06 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 03:06 AM समाप्त: अगले दिन 05:24 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

⭐ मकर संक्रांति

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मकर संक्रांति धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण दिवस है। 15 जनवरी सोमवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी व इस अवसर पर हम मकर संक्रांति मनाते है जिसे देश भर में कहीं लोहड़ी, कहीं खिचड़ी, कहीं पोंगल आदि के रूप में त्योहार मनाया जाता है। मांगलिक कार्य शुरू होने के साथ ही गंगा के धरती पर प्रकट होने के रूप में मनाई जाती है। आप सभी पढ़ें पंडित विष्णुदत्त शास्त्री के साथ मकर संक्रांति पर विशेष आलेख।
संक्रांति मनाने का उद्देश्य
शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से देवताओं का दिन आरंभ होता है जो कि आषाढ़ मास तक रहता है। इसी दिन भगवान सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते है।
एक वर्ष में 12 संक्रांतियाँ होती है जिसमें छह संक्रांतियाँ उत्तरायण की और छह दक्षिणायन की कहलाती है।
भगवान सूर्य अपनी गति से प्रत्येक वर्ष मेष से मीन 12 राशियों में 360 अंश की परिक्रमा करते है । वह एक राशि में 30 अंश का भोग करके दूसरी राशि में पहुँच जाते है, अर्थात प्रत्येक राशि में एक माह तक रहते है

⏱️शास्त्रों में काल गणना के अनुसार⏱️

अहोरात्र का एक दिन सात दिन का एक सप्ताह दो सप्ताह का एक पक्ष ,पक्ष दो होते है शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष इन दोनों को मिलाकर एक मास, दो मास की एक ऋतु, तीन ऋतुओं का एक अयन और दो आयनो को एक वर्ष होता है । आयन दो माने जाते है उत्तरायण और दक्षिणायन , ग्रंथों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन के समय को देवताओं की रात्रि कहा गया है । इस प्रकार मकर संक्रांति देवताओं का प्रभात काल माना गया है । इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है । मान्यता है संक्रांति पर किया गया दान साधारण दान से हजार गुना पुण्य प्रदान करता है ।।
🍀 संक्रांति और पुण्य काल 🍀
इस वर्ष में मकर संक्रांति को लेकर कुछ भेद है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को है कि 15 जनवरी को?

चूँकि भगवान सूर्य 15 जनवरी सोमवार को मकर राशि में रात्रि 02:44 बजे प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति सोमवार 15 जनवरी को प्रात: काल उदया तिथि में मनाई जाएगी।
15 जनवरी को पूरे दिन ही मकर संक्रांति के पर्व का मान रहेगा। प्रात: से मध्याह्न तक का समय स्नान व दान, जप, तप, आदि के लिए विशेष पुण्य फलदायक रहेगा।

महाभारत के अनुसार इसी लिए भीष्म पितामह ने तीरो से अपने शरीर के बिंधे होने के बावजूद भी सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण अपनी देह का त्याग नहीं किया था और सूर्य के उत्तरायन होने पर ही पितामह भीष्म ने अपना देह त्याग किया था।
विष्णु धर्मसूत्र में कहा गया है कि मकर संक्रांति के दिन पितरों की आत्मा की शांति, स्वास्थ्यवर्द्धन तथा सबके कल्याण के लिए तिल के छः प्रयोग अत्यंत पुण्यदायक एवं फल प्रदान करने वाले होते हैं। तिल का इस तरह से प्रयोग करने से भगवान सूर्य देव की कृपा मिलती है, समस्त पापो का नाश होता है, अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन प्रात: स्नान से पहले तिल का उबटन लगाना, जल में तिल डालकर उस तिल के जल से स्नान करना, इस दिन भगवान सूर्य देव को जल में तिल ड़ालकर अर्घ्य देना, पितरो को जल में तिल अर्पण करना, मकर संक्रांति के दिन स्नान, पूजा के बाद तिल का योग्य ब्राह्मण को दान करना, इस दिन यज्ञ में घी मिश्रित तिल की आहुति देना, एवं मकर संक्रांति के तिल तिल से बना भोजन करना अथवा तिल के पदार्थो का सेवन करना ।
इस दिन कंबल, गर्म वस्त्र, घी, गुड़, नमक, दाल-चावल की कच्ची खिचड़ी और तिल आदि का दान विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
🍀संक्रांति फल🍀
इस बार संक्रांति का वाहन अश्व(घोड़ा),उपवाहन सिंह एवं वास रजक (धोबी) के गृह में रहेगा!
जिसका फल निम्न प्रकार से है –
चाँदी,सोना,ताँबा,हाथी,घोड़े,बैल,सूत,कपास इन सबक़ा मूल्य धान्य मात्र हो अर्थात् अधिक तेज हो! राजा क्रोधित रहे मार्गो में भय रहे ! सभी रोगों का नाश हो और बलवान राजाओं को भी चिंता लगी रहे ! लक्ष्मी की प्राप्ति , सौख्य धन और अन्न हों देश में सुख रहे राजा लोग धर्म अधर्म का विधान करते रहे ! मनुष्य सुखी रहे वर्षा अच्छी हो ! सभी जगह मंगल हो। खेतों में पैदावार अच्छी हो । पृथ्वी मनोहर रहे । और विवाह आदि मांगलिक कार्यों में लोग सुखी रहें । कोषाधिकारी जनों की वृद्धि हो । वैद्य, कवि, मद्य व्यापार करने वाले , वणिक , नीतिशास्त्र विशेषज्ञों को पीड़ा हो

रवि संक्रमणे प्रासेन स्नानाद्यस्तु मानवः। सप्तजन्मनि रोगो स्द्यान्निर्धनश्चैव जायतेः।
अर्थात् सूर्य की संक्रांति के दिन जो मनुष्य स्नान नहीं करता है। वो सात जन्मों तक रोगी रहता है। देवी पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता है। वह रोगी और निर्धन बना रहता है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
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