Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 17, 2026
WhatsApp Image 2020-08-05 at 16.03.47
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 अगस्त 2020। 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद हजारों लोगों का संघर्ष और स्वप्न आज साकार हुआ है। आज वो शुभ वेला आयी है जब अयोध्या में सनातन संस्कृति के आधार भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन हो गया है। इस महान घटना में श्रीडूंगरगढ़वासियों के लिए भी गौरवशाली क्षण है और श्रीराममंदिर निर्माण में श्रीडूंगरगढ़ का अपना अद्भुत योगदान रहेगा। श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स की विशेष रिपोर्ट में आप सभी रूबरू हों अपने क्षेत्र के इस गौरव से। श्रीडूंगरगढ़ के निवासी एवं कोलकाता प्रवासी समाजसेवी कन्हैयालाल सिखवाल के नाम से पूरा कस्बा परिचित है। स्वर्गीय सिखवाल के दोहित्र तथा उनकी पुत्री श्रीमती किरण वासुदेव व्यास के सुपुत्र वल्लभ व्यास अयोध्या में 1लाख 21हजार बार शंखनाद कर रहे है। देश के सभी चैनलों पर वल्लभ को दिखाया जा रहा है और वे अपने हाथ में माला लिए लगातार शंखनाद कर रहे है। वल्लभ की माता श्रीडूंगरगढ़ की बेटी श्रीमती किरण व्यास ने टाइम्स को बताया कि वल्लभ 1 अगस्त 2020 से अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के शुभ ऐतिहासिक अवसर पर सरयू नदी के किनारे घाट पर शंखनाद कर रहें है और ये लगातार 1लाख 21 हजार बार तक जारी रहेगा। वल्लभ के नाम इससे पहले नासिक में 1947 बार शंखनाद करने का रिकॉर्ड भी कायम है। अयोध्या में बनने वाले श्रीराम मंदिर के निर्माण में श्रीडूंगरगढ़ के दोहिते की महत्ती भूमिका होने के कारण कस्बेवासी भी खुद को गौरान्वित महसूस कर रहे है।

मामा के मंदिर के लिए भांजा श्रृंगी कर रहा है शंखनाद, ये है पौराणिक कथा।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ के भांजे वल्लभ व्यास के शंखनाद से मंदिर निर्माण हो रहा है। ग्रन्थों में उल्लेख के अनुसार अयोध्या के महाराज दशरथ की बेटी शान्ता का विवाह महर्षि श्रृंग से हुआ था, तथा महर्षि श्रृंग द्वारा सम्पन्न करवाये गये पुत्र कामेष्टि यज्ञ से प्राप्त आशीर्वाद से अयोध्या नंदन राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का जन्म हुआ था। महाराजा दशरथजी की बेटी शान्ता के पुत्र तथा कश्यप ऋषि के पौत्र महर्षि श्रृंग के वंशज सिखवाल, सुखवाल, श्रृंगी वंश की उत्पत्ति हुई, उसी वजह से अयोध्या नरेश राजा श्रीराम, सिखवाल समाज के मामाजी हुए और सैकड़ों वर्षों के पश्चात आज इतिहास को दोहराते हुए मंदिर निर्माण का शुभारंभ भी सिखवाल समाज के युवा “शंख” श्रीवल्लभ व्यास द्वारा किये गये शंखनाद से हो रहा है।