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October 17, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 अक्टूबर 2023। सिद्ध सम्प्रदाय के पवित्र धाम लिखमादेसर के श्रीहंसोजी मंदिर प्रांगण में आज आसोज मेले के दिन दिव्य हवन का आयोजन वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न हुआ। धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष व महंत भंवरनाथजी के निर्देशन में सम्प्रदाय के अनेक मौजिज लोगों ने हवन में आहुतियां दी। महंत ने आगामी माह महिने में धाम में निर्माणाधीन कार्यों का लोकार्पण किए जाने की घोषणा की। विभिन्न गांवो से सैंकड़ो श्रद्धालु तथा सिद्ध सम्प्रदाय के प्रवासी नागरिक भी बड़ी संख्या में दर्शन करने धाम पहुंचे। आज मंदिर प्रागंण में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। रात को सबद गायन के साथ अग्नि नृत्य का आयोजन होगा जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के इस ऐतिहासिक धाम के बारे में विशेष मान्यताएं है, आप भी पढ़ें खास रिपोर्ट।
सिद्ध धर्मावंलबियों के लिए बड़ा तीर्थ है हंसोजी धाम।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अवतारी पुरूष माने जाने वाले जसनाथी महाराज के प्रिय शिष्य हंसोजी महाराज ने लिखमादेसर में श्रीहंसोजी धाम की स्थापना की। लिखमादेसर सिद्ध धर्मावलंबियों के लिए कतरियासर के बाद दूसरे स्थान पर पूज्य यही धाम माना जाता है। गुरू जसनाथजी ने अपनी माला मेखली व सिंहासन हंसोजी महाराज को दिए जो आज भी मंदिर में पूजनीय व दर्शनीय है। मंदिर का भव्य निर्माण राममंदिर की तर्ज पर करवाया जा रहा है। यहां 100 पीलरों के ऊपर बिना सीमेंट व बजरी के पत्थरों से भव्य निर्माण किया जा रहा है। विशाल धर्मशाला व भोजनशाला का भी निर्माण जारी है। ग्राम पंचायत लिखमादेसर के द्वारा भी यहां निर्माण कार्य करवाए जा रहें है।

8 जीवित समाधियों की खूब है मान्यता।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। यहां 8 जीवित समाधियां है और लोकमान्यता के अनुसार यहां की गई प्रार्थना की सुनवाई पूरी होती है। सैंकड़ो श्रद्धालुओं की यहां बड़ी श्रद्धा व मान्यता है। इन समाधियों में श्रीहंसोजी महाराज, सती सीता माँ, कुंभनाथजी, लालनाथजी, खेतनाथजी, गरीबनाथजी, देरामनाथजी व धनराजनाथजी महाराज की जीवित समाधियां स्थित है। मान्यता है कि धनराजनाथजी ने यहां लापसी का भंडारा प्रारंभ किया जो लगातार जारी रहा। मान्यता है कि लापसी बिना गुड़ के यहां के पानी से इतनी मीठी होती थी की दूर-दूर से लोग प्रसाद लेने आते थे।

औंरगजेब को दिखाया चमत्कार, लिखवाया था आज ही के दिन ताम्रपत्र।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सिद्ध मान्यताओं के अनुसार औरंगजेब के शासन काल में राजस्थान का सबसे बड़ा यज्ञ हवन यहां स्थित विशाल यज्ञकुंड में होता था। औरंगजेब ने जब इस पर रोक लगाई तो धनराजनाथजी महाराज के शिष्य रूस्तमजी महाराज यहां से दिल्ली पहुंचे। उन्होंने औरंगजेब को अनेक चमत्कार दिखाए और आखिर औरंगजेब ने आज ही के दिन रूस्तमजी महाराज को लिखमादेसर में यज्ञ हवन करने की अनुमति देते हुए ताम्रपत्र लिखकर दिया। ये पत्र आज भी मंदिर में स्थित है और सिद्ध सम्प्रदाय के नागरिक इसे सनातन की रक्षा में रूस्तमजी का गौरवशाली योगदान होने की बात कहते हुए गर्व प्रकट करते है।