Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
October 17, 2026
0b86eb24-505c-47cb-b4ff-c03c43d67f94
AdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisementAdvertisement

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 जुलाई 2020। किसानों से बिलों की वसूली में अपने समस्त संसाधनों को झोंक देने वाले विद्युत निगम के पास किसानों की फसलों को जलने से रोकने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं है। ऐसी ही विडम्बना देखी जा रही है इन दिनों तहसील के गांव गुंसाईसर बड़ा के 33केवी जीएसएस पर। यहां पर आए दिन होने वाले फाल्ट निकालने की जिम्मेवारी निगम नहीं उठा रहा बल्कि किसानों को ही उठानी पड़ रही है। निगम की यह कार्यशैली, निगम की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है। मंगलवार को सुबह करीब 9 बजे जीएसएस के पास ही लोढ़ेरा फीडर में जम्फर टूट जाने के कारण फाल्ट आ गया था और लोढ़ेरा गांव सहित फीडर से जुड़े 30 कृषि कुंओं की सप्लाई बंद हो गई। बारिश में हो रही देरी एवं तपती गर्मी में कृषि कुंओं पर बोई गई मूंगफली की फसलें सूखने की कगार पर है एवं ऐसे समय में किसानों की एक दिन की बारी भी कटने का सीधा सीधा अर्थ हजारों रुपए का फसलों में नुकसान है। परेशान किसानों ने जीएसएस पर पहुंच कर सम्पर्क किया लेकिन वहां कार्यरत संविदा कार्मिक ने जीएसएस के बाहर लाईनों का फाल्ट दूर करने वाले व्यक्ति का छुट्टी पर होने की बात कही। किसानों ने जेईएन हेमंत कुमार से भी बात की लेकिन उन्होने भी कार्मिक के अवकाश पर होने की बात ही दोहराई। परेशान ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही गांव के एक निजी बिजली मिस्त्री को खंभे पर चढाया एवं फाल्ट दूर करवाया। लेकिन ऐसे में यह सवाल खड़े हो रहे है कि अगर निजी व्यक्ति के साथ कोई हादसा हो जाता तो उसका जिम्मेवार कौन था? विदित रहे कि गांव माणकरासर में कुछ समय पूर्व ऐसा हादसा हुआ भी था, जिसमें निजी व्यक्ति द्वारा फाल्ट दूर करने के दौरान बिजली करंट की चपेट में आने से युवक की मृत्यु हो गई थी। मंगलवार को लोंढेरा फीडर के किसान रामचंद्र डेलू, मूलाराम गोदारा, मालाराम गोदारा, हुक्माराम गोदारा, राजूराम, देवाराम, मूलाराम, आसाराम, हड़मानाराम, तिलोकाराम आदि ने जीएसएस पहुंच कर निगम की इस व्यवस्था के खिलाफ रोष जताया है।

16 घंटे की कटौती हो चुकी है अभी तक, आए दिन बन रहे है यही हालात।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गुंसाईसर बड़ा जीएसएस से निकलने वाले लोढ़ेरा फीडर पर गत दिनों में लगातार फाल्ट आने के कारण निर्धारित सप्लाई से 16 घंटे कम सप्लाई हुई है। निगम द्वारा किसानों को छह घंटे सप्लाई देने की बात कहते हुए छह घंटे के हिसाब से फ्लेट बिल दिए जाते है तो सप्लाई में कमी करने पर बिल में कमी क्यों नहीं की जाती? यह सवाल भी क्षेत्र की जनता विभाग से पूछ रही है। इसी प्रकार अभी जब फसलों में पानी की अधिक आवश्यकता है तो इस समय में छह घंटे से कम सप्लाई के कारण फसलों में होने वाले नुकसान का जिम्मेवार विभाग क्यों नहीं बनता? लोढ़ेरा फीडर के किसानों ने 16 घंटे की कम सप्लाई को अब जल्दी से जल्दी पूरा करने की मांग की है। इस जीएसएस पर यह हालात गत सात दिनों में तीन बार बन गए है जब ग्रामीणों ने जीएसएस पर प्रदर्शन कर अपने हक ही बिजली मांगी है।